मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग नजरों को कमजोर कर रहा है। खासतौर पर बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि कोविड के बाद ऐसे बच्चों की संख्या तीन गुना तक बढ़ी है, जो स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह से आंखों की समस्या से जूझ रहे हैं।
दून मेडिकल कॉलेज में नेत्र रोग विभाग के एक अध्ययन में खुलासा हुआ कि कोविडकाल के बाद मोबाइल, लैपटॉप और टीवी पर बच्चे ज्यादा व्यस्त हुए हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना आंखों के चेकअप के लिए आने वाले 100 लोगों में 30 बच्चे होते हैं। इनमें 50 फीसदी बच्चों की नजर कमजोर हो रही है।
नेत्र रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा के मुताबिक कोविड से पहले ओपीडी में दस फीसदी बच्चे चेकअप के लिए पहुंचते थे। उनका कहना है कि अगर रात में कमरे की लाइट बंद कर दी है तो मोबाइल बिल्कुल न देखें। यह आंखों पर काफी दबाव डालता है।
आंखों में सूखापन कर रहा परेशान
हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. रेनू धस्माना का कहना है कि मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों और वयस्कों की आंखें सूखी, आंखों में खिंचाव और सिरदर्द की समस्या हो रही है। उन्हें यह भी महसूस होता है कि उनकी आंखें बहुत थक गई है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चिराग बहुगुणा के मुताबिक चार से पांच साल की उम्र में ही कई बच्चों को नजर के चश्मे लगाने पड़ रहे हैं। इनमें ऐसे बच्चे शामिल हैं, जिनका स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने का हर दिन औसत समय पांच घंटे तक है। ऐसे दस में पांच बच्चे आंखों की परेशानी से जूझ रहे हैं।
ऐसे रखें ख्याल
कम रोशनी में मोबाइल, टीवी, लैपटाप का प्रयोग न करें।
मोबाइल-लैपटॉप पर लगातार कई घंटे तक काम न करें। बीच-बीच में आंखों को आराम दें।
नजर ठीक भी है तो मोबाइल या लैपटॉप का प्रयोग करते हुए जीरो नंबर का चश्मा जरूर पहनें।
खाने को बनाएं हेल्दी
अपने खाने में विटामिन ए की मात्रा बढ़ाएं। हरी सब्जियां खूब खाएं।
गाजर, आंवला जूस को डाइट में शामिल करें।
फॉस्ट फूड से दूरी बनाएं, हेल्दी डाइट अपनाएं।
रोज 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।
दिनभर में चार-पांच बार आंखों को ठंडे पानी से धोएं।
आंखों से जुड़ी एक्सरसाइज करें।



Leave a Reply