बाघों का नहीं हो रहा शिकार तो कहां से आ रहीं इतनी खाल? अब लगाम लगाने की तैयारी – Vandit Bharti News

बाघों का नहीं हो रहा शिकार तो कहां से आ रहीं इतनी खाल? अब लगाम लगाने की तैयारी

उत्तराखंड में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ इनके शिकार के मामले भी बढ़ रहे हैं। वन विभाग हमेशा से इस तथ्य को झुठलाता रहा है, लेकिन बीते दो माह में एसटीएफ और खुद वन विभाग की संयुक्त टीम ने सात तस्करों को गिरफ्तार करते हुए उनसे बाघ की तीन खालें बरामद की हैं। इसके साथ ही 50 किलो हड्डियां भी बरामद हुई हैं। सवाल यह है कि जब प्रदेश में बाघों का कहीं शिकार नहीं हो रहा, तब यह खालें कहां से आ रही हैं। जुलाई माह में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से जारी वर्ष 2022 के बाघों की गणना के आंकड़ों में 560 बाघों की संख्या के साथ उत्तराखंड को तीसरा स्थान मिला है।

जबकि वर्ष 2018 में यह संख्या 442 थी। इस हिसाब से उत्तराखंड में बाघों की आबादी में 26.7 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है। जबकि इस साल जनवरी से सितंबर माह तक 18 बाघों की मौत दर्ज की गई है। वन विभाग के आंकड़ों में बाघों की मौत की वजह आपसी संघर्ष, प्राकृतिक मौत दिखाई गई है। कुछ में यह जानकारी अज्ञात के रूप में दर्शायी गई है। जबकि कई मामलों में पोस्टमार्टम व फॉरेसिंक रिपोर्ट में बाघों की मौत पहेली बनी हुई है। विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचने में नाकाम रहे कि बाघों की मौत आखिर कैसे हुई।

कुमाऊं क्षेत्र में पकड़ी गई बाघों की तीनों खाल
बाघों के शिकार के मामले कमाऊं में ज्यादा आ रहे हैं। एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने 23 जुलाई को यहां 11 फीट लंबी बाघ की खाल के साथ चार तस्करों को गिरफ्तार किया था। दूसरा मामला कुमाऊं में ही सात सितंबर को सामने आया। एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने दो बाघों की खाल बरामद की है।लगाम लगाने की तैयारी

एक अक्तूबर को वन्यजीव सप्ताह शुरू होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन्यजीवों से जुड़े ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य स्तरीय वन्यजीव अपराध नियंत्रण प्रकोष्ठ बनाए जाने की घोषणा की है। वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, प्रदेश में वन्यजीवों से जुड़े अपराधियों के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैं। जिससे इन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष प्रकोष्ठ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघों की खाल और वन्यजीवों के अन्य अंगों की मांग तस्करों को ललचा रही है। देश में इनकी मांग नहीं है। इस काम में संगठित गिरोह सक्रिय हैं। बीते दिनों प्रदेश में पकड़ी गई बाघों की खालों के मामले में वन विभाग और उसका तंत्र काम कर रहा है। विभाग की जांच में जो बिंदु सामने आएंगे, उस हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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